ज्योतिष – जीवन का GPS

फोटो, साभार: Google आधान लग्न ( गर्भाधान लग्न) पर पिछले कुछ वर्षों से निरंतर शोध करने के पश्चात एक बात जिसकी पुनरावृति होती रही वह रहा चतुर्थांश| जन्म लग्न और नवांश तो फिर भी समझ में आता था पर चतुर्थांश की पुनरावृति क्यों? कुंडली में चतुर्थांश का विश्लेषण हम मुख्यतया मकान देखने हेतु करते हैं, …

Continue reading ज्योतिष – जीवन का GPS

कलयुग का यह काल

कृपाचार्य ने जब अर्जुन के साथ कर्ण के युद्ध पर सवाल उठाए थे तब दुर्योधन ने कर्ण को अंगेश बनाकर न केवल कृपाचार्य के सवालों का जवाब दिया बल्कि आजीवन कर्ण को अपना ॠणी बनाया। कर्ण और दुर्योधन की दोस्ती की नींव डली । महाभारत काल में यह एक महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ है। कलयुग …

Continue reading कलयुग का यह काल

अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबानियों के कब्जे का भारत पर प्रभाव

17 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबानी कब्जे के बाद पहली बार उनके प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने प्रेस कांफ्रेंस के जरिये विश्व से संवाद स्थापित किया| बात का सार यह था कि जो कोई भी इस्लाम के नियम से चलेगा उसे यहाँ कोई परेशानी नहीं होगी|लोगों के जीवन जीने का ढंग, रहन-सहन सब उनकी धार्मिक आस्थाओं …

Continue reading अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबानियों के कब्जे का भारत पर प्रभाव

सूर्य और चंद्र का महत्व

किसी भी व्यक्ति की कुंडली का ज्योतिषीय  विश्लेषण करना हो या प्रकृति का ज्योतिषीय विश्लेषण करना हो तो सर्वप्रथम सूर्य और चंद्र का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया जाता है| ज्योतिषशास्त्र में  आखिर नौ ग्रहों में सबसे पहले इन दोनों का विश्लेषण ही क्यों किया जाता है?? इन दोनों का क्या है महत्व?? संसार और शरीर …

Continue reading सूर्य और चंद्र का महत्व

चंद्र (MOON)

नंदी ..ओ ..नंदी .. कहाँ हो.. मामा के घर से घूम के आने के बाद अब कुछ पढ़ भी लो| दो महीने होने को आये,ज्योतिष की क्लास भी नहीं लगी है तुम्हारी| कुछ याद भी है या सबकुछ भूल भल गयी? कुछ नहीं भूले हैं बाबा| सब याद है| बस आ गए कॉपी कलम लेके| …

Continue reading चंद्र (MOON)

दहीवड़ा

दहीवड़ा बनाते वक़्त अगर हम वड़े को कड़ाही में से तल कर निकालने के बाद थोड़ी देर पानी में रख कर न निचोड़ें तो वह कड़ा और कठोर ही रह जाता है, उसमें कोमलता नहीं आती है| उसके भीतर रस का प्रवेश नहीं होता है| वह टूट जाता है| खाने में कोई स्वाद नहीं आता| …

Continue reading दहीवड़ा

पीपल और हम ( मनुष्य )

हमारे यहाँ अनेक धार्मिक अवसरों पर पीपल वृक्ष के पूजन का विधान है| पीपल में पितरों का वास माना गया है| आखिर पीपल के वृक्ष को हमारे यहाँ इतनी महत्ता क्यों प्रदान की गयी है?? क्या सिर्फ इसी  वजह से या इस वजह से कि यह चौबीसों घंटे जीवन प्रदायिनी ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है?? हमदोनों …

Continue reading पीपल और हम ( मनुष्य )