अक्षय तृतीया- बकवास और सच


1- अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने का विज्ञापन पिछले एक माह से बहुत सारे समाचार पत्रों में तो देखने मिल ही रहा है WhatsApp पर भी इस तरह के मैसेज आ रहे हैं ।
2- इसके अलावा बहुत सारे पोस्ट ऐसे दिख रहे हैं जिसमें यह बताया जा रहा है कि अक्षय तृतीया के दिन ये ये घटनाएँ हुई।
3- इसके साथ साथ ज्योतिषियों का एक बड़ा तबका यह बताने में लगा है कि भिन्न भिन्न राशि के व्यक्ति आज के दिन ये करें।
क्या यह 21वीं सदी का भारत है ??
1-सोना खरीदना- सोना/ आभूषण के खरीद का इस तिथि से कोई लेना देना नहीं है।
अक्षय शब्द का मनोवैज्ञानिक प्रयोग इसे ही कहते हैं। एक तिथि को व्यापार में परिवर्तित कर देना दुखद है।
2 – भिन्न भिन्न युगों में अक्षय तृतीया के दिन हुए घटनाओं की वजह से इस तिथि को अक्षय तृतीया नहीं कहा गया है।
भिन्न भिन्न युगों के घटनाओं का जिक्र करने से बेहतर क्या यह नहीं होता कि हम इस युग में, वर्तमान में changing international mood पर माननीय मोदी जी द्वारा आज लिए जाने वाले निर्णय पर चर्चा करते ।
3 – ऐसे ज्योतिषियों को शर्म क्यों नहीं आती। आखिर क्यों इनके लिए ज्योतिष का सारा सार राशि फल से शुरू और राशि फल पर ही समाप्त हो जाता है। सनातनी वैदिक विधा का मजाक बनाना बंद कीजिए।दिमागी Pollution फैलाना बंद कीजिए।
अब सबसे जरूरी बात – अक्षय तृतीया
इसका रहस्य इन दो शब्दों में ही छुपा हुआ है..
अक्षय तृतीया
वैसी तृतीया जिसका क्षय न हो
अक्षय हो जो तृतीया
पूरे वर्ष में बैशाख शुक्ल तृतीया ही एक ऐसी तिथि होती है जिसका क्षय नहीं होता है।
इस दिन सूर्य और चंद्र दोनों उच्च के होते हैं।
Now the thing is – Common sense apply कीजिए
चीजों में उलझकर भ्रम और भटकाव में मत जाइए…
स्वयं को इतना सबल और सामर्थ्य बनाइए कि जीवन की उच्चता को प्राप्त करते हुए आप ही अक्षय बन जाइए|