वैलेंटाइन डे

आज सुबह से वशिष्ठ बाबू लोगों से घिरे हुए हैं| नंदी सुबह से तीन बार कोशिश कर चुकी है अपने बाबा से बात करने की लेकिन हो ही नहीं पा रहा है| मामा से जाकर नंदी पूछी, क्या बात है मामा आज बाबा को भोरे भोरे कौन लोग आकर घेर लिए हैं| मामा बोली, अरे ये अखबार वाले हैं| ग्रह और नक्षत्रों के बदलते हुए चाल पर बाबा की राय पूछने आये हैं|

अच्छा तो मामा  हम भी जाते हैं बाबा की बात सुनने|

नंदी पहुँच गयी बाहर और ध्यान से सुनने लगी बाबा की बातें|

बाबा कह रहे थे, देखो भाई लोग,एक तरफ सूर्य जहाँ राशि परिवर्तन करके कुम्भ राशि में बृहष्पति के नजदीक दिखने की कोशिश में हैं तो वहीं दूसरी तरफ मंगल , शुक्र के करीब पहुँच रहा है| दो गुरुओं( बृहष्पति, शुक्र) का संबंध ताप कारक ग्रहों के साथ हो रहा है| बृहष्पति ने अपनी गति तेज कर दी है मानो वह सूर्य से अपनी दूरी बनाना चाह रहा है| पर उसे यह नहीं पता कि वह बेकार ही तेज तेज भाग रहा है| सूर्य सिर्फ दिखावे के लिए उसके साथ है वास्तव में उसकी नजदीकी मंगल और शुक्र के साथ बनी हुई है|

अग्नि तत्व राशि में इस प्रकार से ग्रहों का मिलना-

14 /15 /16 फरवरी को

आपसी संबंधों की मधुरता बनी रहे इसलिए अपनी भावनाओं पर काबू रखें|

भावनात्मक बहाव में आकर किसी भी प्रकार का महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें|

मतलब वेलेंटाइन डे जायेगा तेल लेने, एक अखबार वाले ने हँसते हुए कहा|

नंदी सोचने लगी, जल्दी सब जाएं और वह बाबा से पूछे की बाबा संडे, मंडे तो सुना है लेकिन यह यह वैलेंटाइन डे क्या होता है?

गजब संयोग है- आगजनी और बारिश दोनों| आ अइसन लगता है मानो देर सवेर धरती डोलाइए के मानेगा क्या|

लग रहा है मानों गर्मी कूद पड़ने को आतुर है लेकिन ठंढ उसका हाथ पकड़ कर रोक रही है कि अभी नहीं बहन | इतनी बेसब्री अच्छी नहीं| थोड़ा और इंतजार  करो|

प्रकृति तो शांत होने का नाम ही नहीं ले रही है|

बाबा कहे जा रहे हैं  …

नंदी को देखते ही बोले अरे जा त बचवा| मामा से कह त बीस कप चाय बनावे के| आ साथ में तनी जलखइ के व्यवस्था भी करे कहिह|

आज त मामा का बैंड बज जायेगा, सोचते हुए नंदी चल पड़ी मामा तक बाबा का सन्देश पहुँचाने|