गुरु की केंद्रीय स्थिति

आज सुबह ही नेपथ्य में #चांद से मेंरी मुलाकात हुई। मैंने पूछा कि कहाँ हो आजकल? जल्दी दिखाई नहीं देते| और तो और सूरज को भी देखे हुए कई दिन हो गए| तुम दोनों मिलकर कहीं कोई प्लानिंग तो नहीं कर रहे?

उसने कहा अरे अब क्या बताऊँ, #उत्तरप्रदेश का #चुनाव और उसी समय #शनि और #केतु का आपसी गठबंधन जहां उपद्रवी तत्वों द्वारा हिंसक गतिविधियों का षडयंत्र रच रहा है वहीं शुक्र, बुध और सूर्य एक साथ इसको हवा दे रहे हैं और ऐसे में मंगल इन चारों को अपना गुप्त समर्थन दे रहा है। यह बात तो परेशान कर ही रहा है, इससे भी ज्यादा परेशान #बृहस्पति का व्यवहार कर रहा है। वह इन सभी से अपने आप को अलग कर लिया है|अब बताओ भला, जिसे उपचार करना चाहिए वही कुछ न करे तो दिमगवा त खराब होवे न करेगा।

अइसे में कोनो कइसे दिखे।

इसी समय प्रकृति का नेचर भी बिगड़ रहा है। #कल से लेकर #19तारीख तक बारिश भगवान भी अपना रूप बिगाड़े हुए ही रहेंगे| #23जनवरी को बुध भी बेकाबू हो रहा है| सूर्य के गिरफ्त से छूटकर शुक्र के नजदीक जा रहा है यह स्थिति ओला गिरने और तेज बर्फ़बारी की स्थिति बनाएंगे|

#29/30/ 31 जनवरी को आठ ग्रहों का जिस प्रकार गठबंधन हो रहा है मानो वह पूर्वोत्तर भारत में कुछ ज्यादा ही उपद्रव मचाने का प्लानिंग कर रहे हैं|

तऽ अब बताओ भला इस चुनाव नेचर को संभाले कि उपद्दर के नेचर को संभाले?? बड़ा विकट समस्या है।

क्या करें इस बृहस्पति का कुछ समझे नहीं आता है|

मैंने कहा, अरे जरा ध्यान से बृहस्पति को देखो| उसने अपने आप को उपद्रवी तत्व से तो अलग किया है लेकिन तुमने ध्यान नहीं दिया कि जिस समय सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे थे उस समय उन्होंने अपने लिए जो जगह चुनी वह भारत के लिए आने वाले समय में विश्व को अपनी नीतियों, चाहे वह आर्थिक नीति हो या सामरिक नीति, से चकित करने वाला समय रहने वाला है|

यह तो शुभ संकेत है न।

गुरु बहुत अच्छे से जानते हैं कि जल्द ही तुम उत्तर आषाढ़ से मिलने वाले हो। आंतरिक अस्थिरता न बढ़े इसीलिए उन्होंने अपनी जगह पहले ही निर्धारित कर ली है|

तो अब चलो यहाँ से निकलो बाहर और चलकर आते हुए बसंत के स्वागत की तैयारियों में लग जाओ…

चाँद ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा, बुद्धू बसंत को लाया नहीं जाता .. बसंती हुआ जाता है…