ज्योतिष

ज्योतिष को ज्ञान की तरह स्थापित करने के बजाय इसका धंधा शुरू हो गया..

ज्योतिष को कथावाचन बना दिया ..

कैसे कैसे अजीब लोग आ गए यहाँ..

कभी ये सोचने की कोशिश की, कि ज्ञान की वैदिक परंपरा जब हम तक पहुँचती है तो कुंडली का रूप लेकर क्यों आती है …

कभी इसको सोचने की कोशिश की, कि कुंडली में निहित तत्वार्थ क्या है..

कभी यह सोचने की कोशिश की, कि पराम्बा शक्ति को जाने बगैर ज्योतिष को जाना ही नहीं जा सकता…

कथावाचक बहुत बन लिए…

राशिफल बहुत बता दिए..

रत्न बहुत बेच लिए..

अरे, कुछ तो शर्म कीजिए..

अब तो छोड़िए सब..

जरा ज्योतिष से मिल लीजिए…