ज्योतिष की पहचान

ज्योतिष ऐसे ही Identity Crisis से नहीं गुजर रहा है|

अब देखिये न एक जनवरी के आने से पहले ही ज्योतिष के नाम पर बाजार में राशि फल कथन का भोग परोसा जा चुका है| मेष राशि वालों के लिए ऐसा होगा यह साल, तुला राशि वालों के लिए ऐसा होगा यह साल, मीन राशि वालों के लिए ऐसा होगा यह साल… आदि आदि|

इक्कीसवीं सदी है, यहाँ सबसे पहले तो यह पूछना बनता है कि नया साल तो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होगा न…

दूसरी बात इन तथाकथित उपायाचार्यों से यह पूछना बनता है कि यहाँ तो अपनी ही हथेलियों की पांचो अंगुलियां सामान नहीं हैं और हम पूरी दुनिया के लोगों को बारह राशियों के आधार पर बारह ही प्रकार से बराबर बनाने की बात कर रहे हैं|

पूरी दुनिया के लोग बारह ही प्रकार से होंगे क्या??

सरल सी बात बात है कि नहीं हो सकते…

Mundane Astrology , ज्योतिषशास्त्र की इस शाखा में Wars , disasters such as earthquakes , volcanic erruption जैसी घटनाएं और ऐसी घटनाएं भी जो समाज को प्रभावित करती हैं या समाज के व्यवहार को प्रभावित करती हैं.. इन सभी का विस्तार से विश्लेषण किया जाता है| इस शाखा के तहत जितने भी principles हैं वे सभी principles..  need verification with reference to present time.

उन्हें ‘काल-सापेक्ष’ बनाना होगा|

यह किस प्रकार होगा?

यह होगा निरंतर शोध (research) के द्वारा|

प्राकृतिक असंतुलन पर कुछ समय से किये जा रहे निज शोध से मैंने ग्रहों के चाल के अनुसार  कुछ बातों को observe किया है और उसके अनुसार आने वाले कुछ माह में प्राकृतिक उत्पात के योग बनेंगे| भूकंप का योग भी निर्मित होगा| असमय ओले गिरने का योग भी निर्मित होगा|

  • जनवरी माह का अंतिम सप्ताह 
  • फरवरी माह का पहला सप्ताह और अंतिम सप्ताह
  • मार्च माह का अंतिम सप्ताह,

प्राकृतिक उत्पात, भूकंप की भूमिका बनाएंगे|

  • मार्च के अंतिम सप्ताह और अप्रैल के पहले सप्ताह में ओले गिरने का योग निर्मित होगा|

प्रकृति और मौसम का यह बदलता रूप आम जनों के लिए क्या कष्टकारी  होगा ??

इसका सही आकलन तभी हो पायेगा जब भूगर्भ वैज्ञानिक और मौसम वैज्ञानिक भी ज्योतिष के साथ एक मंच पर आकर काम करेंगे|

आइये सब मिलकर ज्योतिष को उसकी पहचान वापस करें…