छल कपट को कैसे पहचानें

आप में से कई लोग अपनी जीवन में किसी न किसी के छल, कपट या धोखे के शिकार हुए होंगे| तब मन में यह विचार जरूर आया होगा कि काश हमें पहले ही पता चल जाता इस व्यक्ति के बारे में तो हम इस प्रकार के छल, कपट और धोखे से बच सकते थे|

ऐसा आप तब सोचते हैं जब ठगे जा चुके होते हैं, छले जा चुके होते हैं या कपट के शिकार हो चुके होते हैं|

क्या ही बढ़िया हो कि समय से पहले ही आपको एक दूसरे की कुंडली से इस प्रकार के छल, कपट और धोखा देने वाले योग की जानकारी हो जाये|

तो आइये एक लघु कथा के माध्यम से इस योग को समझने का एक ज्योतिषीय प्रयास करें|

एक गांव में सुमत और कुमत दो बढ़ई रहते थे| वे दोनों बड़े ही हुनरमंद बढ़ई थे | उनके हुनर की चर्चा दूर दूर तक फैली हुई थी| एक बार ऐसा हुआ कि देश  में एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया| प्रतियोगिता का पहला भाग था एक ऊँची सीढ़ी बनाना| इसका दूसरा भाग यह था कि उस सीढ़ी पर चढ़कर शहर के बुद्धिजीवी लोग आसमान से होते हुए आकाश लोक तक जायेंगे|

सीढ़ी तैयार करने के लिए एक माह का समय निर्धारित किया गया|

यह तय हुआ कि जिसकी  बनाई सीढ़ी के सहारे बुद्धिजीवी वर्ग आसमान तक पहुँच जाएंगे वह व्यक्ति विजेता घोषित किया जायेगा|

इनाम स्वरुप बहुत बड़ी धनराशि तय की गयी|

पूरे देश में डुगडुगी पिटवा दी गयी||

दोनों बढ़ई ने सोचा कि क्यों न हम भी आसमान तक पहुँचाने वाली सीढ़ी को बनाएं| क्या पता इनाम की धनराशि हमें ही मिल जाए|

ऐसा सोचकर  दोनों लग गए अपनी अपनी सीढ़ी को बनाने में| उधर दोनों सीढ़ी बनाने में लगे इधर चंद्र ने अपना राशि परिवर्तन किया| राशि परिवर्तन करके कुमत की चलने वाली दशा को अपने प्रभाव में लिया| कमजोर दशा को जैसे ही गोचरीय चंद्र ने अपने प्रभाव में लिया, परिणाम यह हुआ कि उसकी  कुंडली में चित्र योग सक्रीय हो गया| उसकी  नियत डगमगाने लगी| वह सोचने लगा कि येन केन प्रकारेण मैं ही वह सीढ़ी बनाऊं और सारी इनाम राशि मैं ही पाऊं| कुछ भी करके कैसे भी कर के सुमत के कार्य को बाधित करूँ|

दो चार दिन वह इसी उधेड़बुन में रहा| सुमत ने पूछा भी कि क्यों परेशान दिख रहे हो तो कहा कि नहीं ऐसी कोई बात नहीं है| बस समय से सीढ़ी तैयार हो जाये यही चलता रहता है दिमाग में| सुमत का सरल मन कुमत के कपटी दिमाग को नहीं पढ़ पाया|

एक रात को जब सुमत दिन भर की मेहनत के बाद थक हार के सो रहा था तब चुपके से कुमत उठा और सुमत की सीढ़ी में से एक पायदान हटा कर वहाँ पर पायदान का चित्र लगा दिया| चित्र इतना सजीव था कि देखने वालों को पता ही नहीं चलता कि यहाँ सीढ़ी का पायदान नहीं बल्कि चित्र लगा है|

कुमत की कारस्तानी से अनभिज्ञ सुमत प्रातः उठकर दैनिक क्रिया कलापों से निबटकर  लग गया सीढ़ी के निर्माण में| उधर कुमत भी मुस्कुराते हुए अपनी कार्य में लग गया| कई दिनों के बाद सुमत ने कुमत को मुस्कुराते देखा तो उसे तसल्ली हुई कि चलो कुमत  की परेशानी दूर हुई| उसका सरल मन यह नहीं समझ पाया कि कुमत  उसके ही खिलाफ साजिश रच रहा है|

महीना पूरा हुआ| सीढ़ी का निर्माण भी पूरा हुआ|

आयोजक समिति द्वारा तय समय पर अभिजीत मुहूर्त में सभी सीढ़ियों  को आसमान से लगाकर खड़ा कर दिया गया| शहर के बुद्धिजीवी लोग बारी बारी से, आसमान पर जाने के लिए सीढ़ी पर चढ़ना शुरू किये पर किसी भी सीढ़ी से वे चढ़ने में सफल नहीं हुए| धीरे धीरे कुमत और सुमत के सीढ़ी पर चढ़ने की बारी आयी| पहले वे सुमत की सीढ़ी पर चढ़ना शुरू किये| बड़े आराम और इत्मीनान से वे चढ़े जा रहे थे| उनको सीढ़ियों पर चढ़ते देख सुमत हर्षित हो रहा था| आसमान पर पहुँचने में अब बस कुल दस पायदान ही बची थीं की यह क्या!! जिसे वे पायदान समझ रहे थे वह तो उनका भ्रम था| वहां तो पायदान की जगह चित्र लगा था|| चित्र इतना सजीव था कि वे यह समझ ही नहीं पाए कि यह सीढ़ी का पायदान नहीं है| जैसे ही वे पैर रखने को हुए कि उनका संतुलन बिगड़ा|

एक बुद्धिजीवी का संतुलन बिगड़ा और जैसे ही एक का संतुलन बिगड़ा उसके पीछे चढ़ रहे सभी का संतुलन बिगड़ा और धम्म!!!

सभी भरभरा के जमीन पर आ गिरे|

ये क्या हुआ? ऐसा क्यों हुआ? मैंने तो सीढ़ी बनाने में अपनी तरफ से कोई गलती नहीं की फिर ये कैसे हुआ? यही सोचकर सुमत थोड़ा उदास हुआ |

अब कुमत के सीढ़ी पर सबके चढ़ने की बारी आई| कहते हैं न कि दूध का जला छांछ भी फूँक फूँक कर पीता है सो सब संभल संभल के सीढ़ी पर पैर रखने लगे| नीचे सब सांस रोके उनको सीढ़ी पर चढ़ते देख रहे थे| सबके मन में यह बात चल रही थी कि क्या इस बार ये आसमान तक पहुँच पायेंगे या इस बार भी सुमत की सीढ़ी वाला हाल होगा| इन सबकी घबड़ाहट और सोच से परे कुमत के मन में लड्डू फूट रहा था|

देखते देखते वह समय भी आ गया जब एक एक करके सभी बुद्धिजीवी आकाश लोक में पहुँच गए|

उन सबके वहां पहुँचते ही नीचे देखने वालों में हर्ष की लहर दौड़ गयी| सभी कुमत को बधाई देने लगे| उसकी जय जयकार होने लगी| इनाम की धनराशि उसे देकर उसे सम्मानित किया गया| कुमत के छल कपट और धोखे से अनजान सुमत भी उसकी खुशियों में दिल से शामिल हुआ|

पर क्या सच में कुमत इनका अधिकारी था…..????

इस कथा को यहीं विराम देकर आइये जाने कि किसी व्यक्ति की कुंडली से इस योग को, छल, कपट और धोखा देने की प्रवृत्ति को कैसे पहचानें??

1 – जिस ग्रह की दशा चल रही है यदि वह ग्रह कन्या राशि के अंतिम नवांश में होकर कुंडली के पंचम भाव में अवस्थित हो और शनि केतु और मंगल  के साथ युति में हो|

2 – कुंडली में चन्द्रमा और बुध अशुभ प्रभाव में हो, वक्री हो, नीच का हो या विष नवांश में हो|

3 – कुंडली में पंचम पंचमेश अशुभ प्रभाव में हो या अशुभ ग्रहों के साथ इनकी युति हो|

4 – द्वितीय भाव और द्वितीयेश अशुभ प्रभाव में हों|

5 – चतुर्थ भाव पाप प्रभाव में हो, चतुर्थेश नीच का होकर, अस्त होकर अशुभ भावों में हो और चन्द्रमा कमजोर हो|