आने वाले वर्ष ( 2022 ) का सन्देश

आज का यह आलेख एक असहनीय पीड़ा में लिखा जा रहा है| अभी अभी एक दुर्घटना में देश ने अपने रक्षा प्रमुख के साथ साथ देश के अप्रतिम वीरों को खोया है| असहनीय पीड़ा इसलिए भी कि ग्रहों और प्रकृति के द्वारा बार बार इस तरह की दुर्घटना का संकेत दिए जाने के बाद भी हम कुछ नहीं कर पाए| पिछले महीने चंद्र परिवेश ने भी देश के रक्षा प्रमुख के लिए यह समय कष्टकारी होगा, ऐसा संकेत दिया था फिर भी हमने इसकी अनदेखी की|

आखिर क्यों करते हैं हम ऐसा?? ज्योतिष के नाम पर दुकान चलने वाले व्यापारियों को तो हम स्वीकारते हैं लेकिन ज्योतिष को नहीं स्वीकारते|

क्यों हम ज्योतिष का मतलब सिर्फ राशि फल कथन, भिन्न भिन्न प्रकार के रत्न धारण करना और यज्ञ एवं कर्मकांड के नाम पर नौटंकी किया जाना समझते हैं?

किसी चीज को जानना ज्ञान है, उसे पहचानना विज्ञान है और उसके साथ एकात्म स्थापित करना ज्योतिष है| समग्रता और विविधता के बीच का एकात्म ज्योतिष है| ज्योतिष के अनुसार भले ही सारी चीजें भिन्न भिन्न प्रतीत होती हैं लेकिन उस विविधता के भीतर एकत्व कार्य कर रहा है| जब यह एकत्व स्थापित हो जाता है तब प्रकृति द्वारा दिए गए हर एक संकेत को हम समझ पाते हैं , हर एक सन्देश को हम पढ़ पाते हैं| इसकी शुरुआत होती है कुंडली विश्लेषण से|

कुंडली – सकारात्मक और समृद्ध जीवन निर्माण का एक महत्वपूर्ण उपकरण है| लेकिन  इसका आश्रय लेकर आज कितना दुर्गन्ध फैलाया जा रहा है और हर वर्ग के व्यक्ति को कुंठा और अवसाद में धकेला जा रहा है यह कोई कहने की बात नहीं है| दुःख तो तब होता है जब इस प्रकार के बाजार के खेल में लोकतंत्र के एक सशक्त स्तम्भ मीडिया शामिल हो जाता है|

मैंने समय समय पर अपने आलेखों के माध्यम से ग्रहों के संकेत को सबके साथ साँझा किया है|

भारतवर्ष जब भी इस तरह के संकट से गुजरा है तब तब, बृहस्पति, शनि और मंगल एक दूसरे के साथ  खास संवाद स्थापित करते हैं| आप कहेंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है कि देश की आंतरिक और बाह्य अस्थिरता ग्रहों के अधीन हो| मेरे द्वारा पिछले कुछ वर्षों से किये जा रहे  शोध से मैंने यह पाया है कि जब जब इन ग्रहों के बीच एक खास संवाद स्थापित होता है तब तब देश संकट की घड़ी से गुजरता है| चाहे वह युद्ध हो, सीमा सम्बन्धी विवाद हो, आंतरिक अस्थिरता हो या दो पूर्व प्रधानमंत्रियों की हत्या हो|

पिछले माह के उन्नीस नवंबर को भी मैंने चंद्र का चारों तरफ बनने वाले परिवेश के आधार पर यह लिखा था कि आने वाला समय सेना प्रमुख के लिए कष्टकारी है|

काल के उस खंड में सम्पूर्ण विश्व ने प्रवेश किया है जिसके मुहाने पर लिखा है – खतरा संभावित क्षेत्र| और इस क्षेत्र में हमारे द्वारा की गयी एक एक हल्की सी चूक भी राई का पहाड़ खड़ा कर सकती है, और काल के बल को  हम सब जानते हैं| त्रेता में जिस कार्य को करने से गुरु स्वयं को बचाते हैं, द्वापर में गुरु स्वयं उस प्रक्रिया में उतर जाते हैं|

इस आलेख को लिखने का उद्देश्य ज्ञान देना नहीं है बल्कि ज्योतिष के बीजारोपण का है| अपनी मति के अनुसार मैंने जो समझा और उस समझ के सूत्र को सबके साथ साँझा किया, क्या पता कल कोई अन्य उस सूत्र का आश्रय लेकर जीवन निर्माण की खोज में अपनी महती भूमिका दर्ज करवा सके| किसे पता था कि महर्षि कणाद के दिए गए सूत्र का आश्रय लेकर एक नहीं, दो नहीं, दस नहीं बल्कि हज़ार वर्ष बाद प्रशस्त पाद उसे विस्तार देंगे और कणों की दुनिया में एक क्रांति का सूत्रपात करेंगे|

इन्ही सभी बातों का मनन करते हुए आइये देखें ग्रहों के संकेत क्या हैं 2022 में ( मुख्यतया भारत के सन्दर्भ में)- 

1 – संक्रमण और महामारी- यह वर्ष भी हमें पूर्ण रूप से महामारी से मुक्त करने वाला नहीं होगा|

संक्रमण के नाम पर किये जाने वाले षड्यंत्रों में वृद्धि होगी|

2 – आर्थिक मंदी- आर्थिक मंदी से इस वर्ष भी देश बाहर नहीं आ पायेगा तात्पर्य यह कि वर्ष 2022 में भी आर्थिक मंदी रहेगी|

3 – केंद्रीय सत्ता- केंद्रीय सरकार को कमजोर करने और केंद्रीय साख को धूमिल करने की पुरजोर कोशिशें  बाह्य ताकतों द्वारा की जाएँगी| एक प्रकार से कहा जाये तो यह वर्ष केंद्रीय सरकार के लिए ह्रदय शूल देने वाला होगा|

4 – एक ऐसे बदलाव की शुरुआत होगी जो शताब्दियों में एक बार होता है| न सिर्फ देश में अंदरूनी बदलाव होंगे बल्कि सत्ता का विकेन्द्रीकरण भीहोगा|

5 – देश ही नहीं वरन विश्व राजनीति में Paradigm Shift का संकेत मिल रहा है|

6 – एक के बाद एक लगातार हर फ्रंट पर कई  बदलाव महसूस किये जायेंगे| |

7 – सीमावर्ती इलाकों और सीमा क्षेत्र में आधारभूत संरचना को मजबूत किया जाएगा| सिर्फ कूटनैतिक प्रयासों में ही तेजी नहीं लाई जाएगी वरन रक्षा तंत्र को और मजबूत किया जाएगा|

8- खेती किसानी-  खेती किसानी के लिए पिछले वर्ष की अपेक्षा बेहतर वर्ष होगा|

9 – कला के क्षेत्र में महिलाओं द्वारा नए कीर्तिमान गढ़े जायेंगे|

10 – मंगल शनि सूर्य के साथ को गुरु शुक्र का समर्थन प्राप्त  होना और  मंगल और शनि के साथ के समय राहु का मेष  राशि में होना, शनि मंगल के साथ राहु का केन्द्रगत सम्बन्ध बनाना, देश की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने का संकेत तो दे ही रहे हैं साथ ही साथ हम सभी को भी सतर्क और सचेत रहने  का संकेत दे रहे हैं| एक महत्वपूर्ण संकेत यह कि इस प्रयास में हलकी सी ढिलाई भी देश को संकट में डाल सकता है, युद्ध जैसे हालात बना सकता है सीमा सम्बन्धी विवाद को तूल दे सकता है, आंतरिक अस्थिरता को बढ़ा सकता है|

11- सीमा पर दुश्मनो से निपटने के लिए सरकार के पास पर्याप्त सेना है पर देश के भीतर के अराजक तत्वों से लड़ना सरकार के लिए  एक अहम् चुनौती होगी|

समय रहते यदि हमने ग्रहों के साथ एकात्म स्थापित करना आरंभ नहीं किया तो जैसा कि मैंने मार्च’2020 में लिखा था पुनः दोहराती हूँ =

आने वाले वर्षों में 2029 एक ऐसा वर्ष होगा जब विश्व युद्ध के कगार पर होगा | यहाँ से जो विभीषिका शुरू होगी वह 2031 और 2044 में अपने चरम पर होगा |

आगे आने वाले वर्षों में 2023, 2026, 2031 और 2044 ऐसे वर्ष होंगे जब जलवायु परिवर्तन की वजह से बर्फ से ढंके रहने वाला आर्कटिक सागर में बर्फ की कमी होगी | प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि की वजह से तबाही बढ़ेगी |