‘धन’ तेरस ( 2 नवंबर 2021 मंगलवार)

Story Of Bhagwan Dhanvantari Who Bless With Healthy Life - ऐसे प्रकट हुए थे भगवान  धन्वंतरि, पूजन से देंगे स्वस्थ जीवन का वरदान | Patrika News

कोरोना को लेकर इस वर्ष लोगों की सेहत तो संकट में है ही, घरों से लक्ष्मी भी गायब है| ऐसे में धनतेरस की चर्चा प्रासंगिक हो जाती है|

धनतेरस क्या है इसको जानने के साथ साथ धनतेरस के ‘धन’  का क्या है गूढ़ अर्थ यह जानेंगे साथ ही ज्योतिष शास्त्र  क्या कहता है धन के बारे में, इसको भी जानेंगे|

धनतेरस

‘श्रीमद्भागवत के अनुसार  समुद्र-मंथन  से मिलने वाले 14 रत्नों में से एक आरोग्य के भगवान् धन्वंतरि थे जिनका प्राकट्य मंथन के परिणामस्वरूप त्रयोदशी के दिन हुआ था|

तेरस- त्रयोदशी तिथि के लिए प्रयोग किया जाता है|

तेरस शब्द के बारे में यह भी मान्यता है कि  इस दिन खरीदे गए धन में 13 गुना बढ़ोतरी होती है।

धन्वंतरि के एक हाथ में आयुर्वेद शास्त्र, एक में वनस्पति, एक में शंख और एक हाथ में जीवनदायी पेय अमृत था।

अमृत मंथन के दौरान धन की देवी लक्ष्मी का भी प्राकट्य हुआ था| इसलिए कह सकते हैं कि धनतेरस आरोग्य और लक्ष्मी का त्यौहार है|

धन

आरोग्य के देव धन्वंतरि भी और धन की देवी माँ लक्ष्मी भी, दोनों हैं यहाँ|

प्रथम दृष्टि से,धन की बात हो तो रोग से मुक्ति की बात कुछ समझ में नहीं आती है|

ज्योतिष के अनुसार  –

कुंडली में रोग के लिए छठे भाव की चर्चा की जाती है|

धन के साथ रोग को क्यों जोड़ा गया?

थोड़ा इस रहस्य को जाने|

कहते हैं कि स्वास्थ्य ही धन है|

कुंडली का छठा भाव – रोग, ऋण और रिपु( शत्रु) का भाव कहा गया है|

इस भाव के भीतर प्रवेश करें

 इस भाव को अर्थ भाव कहा गया है|

उदहारण से इसे समझें-

रामचरितमानस में शत्रुघ्न को अर्थ कहा गया है| यही शत्रुघ्न, मंथरा ( मंथरा और कैकेयी प्रकरण) को बालों से घसीटते हुए उसपर लातों का प्रहार करते हैं| क्यों? क्योंकि मंथरा के रूप में लोभ वृत्ति का परिवार में प्रवेश हो रहा है| अर्थ जब लोभ से जुड़ेगा तो, रोग लाएगा, विनाश लाएगा, इसलिए शत्रुघ्न उस लोभवृत्ति का नाश करते हैं| शत्रुघ्न का विवाह श्रुतिकीर्ति से हुआ है| श्रुति वेद को भी कहा जाता है और कीर्ति माने यश| 

क्या संकेत है?

 यह संकेत है कि अर्थ अगर वेद से जुड़ जाए तो ऐसा अर्थ, ऐसा धन यश प्रदान करने वाला होता है|

धनतेरस केधनका एक रहस्य तो यह है|

इसके अलावा कुंडली में अन्य भावों की सहायता से धनयोगों का निर्माण होता है साथ ही ग्रहों के आपसी मेल से भी धन योग का निर्माण होता है|

क्या हैं ये, इन्हे देखें|

भावों की सहायता से बनने वाला धन योग

कुंडली का दूसरा भाव, पंचम भाव, नवम भाव और एकादश भाव इन चारो भावों और भावेश के बीच का सम्बन्ध जितना घनिष्ठ होगा व्यक्ति के जीवन में धन प्राप्ति का योग उतना ही प्रबल होगा|

 इस योग को अगर सम्बंधित दशा का सहयोग भी मिल गया तब तो सोने पे सुहागा हो जाएगा|

कभी कभी ऐसा भी देखने में आता है कि कोई व्यक्ति,जो अभी तक गरीबी में जीवन का निर्वाह कर रहा था,अचानक से उसकी लॉटरी लग जाती है और वह रातों रात प्रचुर धन का मालिक हो जाता है| या फिर अचनाक से उसके काम में लाभ होने लगता है| इसके पीछे क्या रहस्य है? इसके पीछे का रहस्य यह है कि व्यक्ति की दशा बदलती है और इस बदली हुई दशा में, दशा से द्वितीय भाव, पंचम भाव, नवम भाव और एकादश भाव के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध स्थापित हो जाता है| जब तक यह दशा चलती है, व्यक्ति पर माँ लक्ष्मी की भरपूर कृपा रहती| दशा समाप्त होते ही यह सम्बन्ध टूटता है और धन का प्रभाव बाधित हो जाता है|

ग्रहों के संयोग से बनने वाले धन योग ( संक्षिप्त वर्णन) –

1- कुंडली में सूर्य और चंद्र उच्च के हों, शुक्र या गुरु पंचम या नवम में हो तो धन योग होता है|

2- सूर्य छठे भाव में, मंगल नवम भाव में, गुरु पंचम भाव में और बुध,शुक्र केंद्र भाव में हो तो धन योग होता है|

3- बुध लग्न भाव में, चन्द्रमा चतुर्थ भाव में, गुरु नवम भाव में और राहु एकादश भाव में हो तो धन योग होता है|

4- गुरु द्वितीय भाव में और शुक्र अष्टम भाव में हो तो धन यह होता है|

इस प्रकार हमने देखा कि आरोग्य और समृद्धि दोनों की प्राप्ति हेतु ज्योतिष हमारा मार्गदर्शन करता है|

आरोग्य के देव धन्वंतरि की कृपा और धन दी देवी लक्ष्मी की कृपा हम सब पर बनी रहे, भारतीय चिकित्सा विज्ञान की आधारशिला आयुर्वेद स्पंदित हो, ज्योतिष के माध्यम से हम आयुर्वेद की तरफ लौटें   यही मंगल कामना|

धनतेरस शुभ मुहूर्त ( 2021 )

शाम – 5:25 से 6 बजे तक|

प्रदोष काल –

शाम – 5:39 से 8:15 तक

@ कृष्णा नारायण